Bahut Daraz Fasana Hai Ye | बहुत दराज़ फ़साना है ये

Bahut Daraz Fasana Hai Ye,
Ik Zakham Bahut Purana Hai Ye,

Kuch Rog Hote Hain Lailaz,
Ik Zakham Kha Ke Jana Hai Ye,

Geet Virah Ka Umar Bhar Hi,
Humko Bas Ab Gaana Hai Ye,

Kuch Log Milte Hain Qismaton Se,
Us Se Bichad Ke Jana Hai Ye,

Hai ‘ISHQ’ Nahin Ye Sab Ke Liye,
“Raaz” Humne Ab Mana Hai Ye. .!!

बहुत दराज़ फ़साना है ये | Bahut Daraz Fasana Hai Ye

बहुत दराज़ फ़साना है ये,
इक ज़ख्म बहुत पुराना है ये,

कुछ रोग होते हैं लाइलाज़,
इक ज़ख्म खा के जाना है ये,

गीत विरह का उम्र भर ही,
हमको बस अब गाना है ये,

कुछ लोग मिलते हैं किस्मतों से,
उस से बिछड़ के जाना है ये,

है इश्क़ नहीं ये सब के लिए,
“राज” हमने अब माना है ये. .!!

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